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चंद्रमा नहीं होगा ग्रस्त और न ही लगेगा सूतक

खगोलीयं घटना : इस साल होंगे छह ग्रहण, पहला उप छाया चंद्र ग्रहण आज

ग्वालियर, विजय पाण्डेय । नये साल 2020 की पहली खगोलीय घटना पौष शुक्ल पूर्णिमा यानी 10 जनवरी शुक्रवार की रात घटित होगी। इस रात साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। जो कि मिथुन राशि के पुनर्वसु नक्षत्र में होगा। रात 10.37 से मध्य रात्रि 2.40 बजे तक इसका प्रभाव रहेगा। लेकिन इसका सूतक नहीं लगेगा। यह मात्र उप छाया चंद्र ग्रहण है। इसमें चंद्रमा पूरी तरह छिपेगा नहीं और न हीं ग्रस्त होगा। इस कारण मंदिरों के कपाट भी खुले रहेंगे। कोई भी यम, नियम और सूतक मान्य नहीं होगा।
ग्रहण की खास बातें
उपछाया क पहला स्पर्श
10.39 बजे
परमग्रास चंद्र ग्रहण
12.39 बजे
उपछाया से अंतिम स्पर्श
2.40 बजे
उपछाया की अवधि
4 घंटे 1 मिनट 47 सेंकेण्ड्स
उपछाया चंद्र ग्रहण का परिणाम
0.89
सूतक नहीं होगा मान्य

पंडित विजय भूषण वेदार्थी के अनुसार चंद्र ग्रहण लगने के नौ घंटे पूर्व सूतक लग जाता है लेकिन इस चंद्र ग्रहण में सूतक का प्रभाव नहीं रहेगा। क्योंकि यह उप छाया चंद्र ग्रहण है और भारतीय ज्योतिष शास्त्र और विभिन्न पंचांगों के मुताबिक उप छाया चंद्र ग्रहण को चंद्र ग्रहण की श्रेणी में नहीं रखा जाता है। इसलिए पूर्णिमा तिथि पर होने वाले समस्त धार्मिक पूजा-पाठ किए जा सकेंगे।
जानिए क्या होता है उप छाया चंद्र ग्रहण
पंडित सुनील दत्त शुक्ला खेरला के मुताबिक ग्रहण से पहले चंद्रमा पृथ्वी की उप छाया में प्रवेश करता है। जिसे चंद्र मालिन्य कहते हैं। इसके बाद वह पृथ्वी की वास्तविक छाया भूभा में प्रवेश करता है। इस स्थिति में वास्तविक ग्रहण होता है। लेकिन कई बार चंद्रमा उप छाया में प्रवेश करके उप छाया शंकु से ही होकर बाहर आ जाता है और भूभा में प्रवेश नहीं करता है। उप छाया के समय चंद्रमा का बिम्ब महज धुंधला पड़ता है काला नहीं होता। इस धुंधलेपन को भी सामान्य रूप से देखा नहीं जा सकता है। इसलिए चंद्र मालिन्य मात्र होने या माद्य यानी मंध पड़ने से इसे उप छाया चंद्र ग्रहण कहते हैं न कि पूर्ण चंद्र ग्रहण।
इन देशों में दिखेगा
उपछाया चंद्र ग्रहण संपूर्ण भारत में देखा जा सकेगा। भारत के अलावा ग्रहण को यूरोप, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया सहित एशिया के अनेक देशों में भी दिखेगा।
गंगा स्नान और दान से पुण्य
पंडितों के मुताबिक ग्रहण के बाद 11 जनवरी शनिवार की सुबह गंगा स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है। चंद ग्रहण के बाद दूध, दही, चावल, शक्कर, गेहूं, चना, मसूर की दाल, चांदी के आभूषण, सफेद व गुलाबी वस्त्र और पुष्प का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। घर की पवित्रता और शु़द्ध के लिए गंगाजल में इत्र या गुलाबजल मिलाकर छिड़काव करने से धन-धान्य एवं सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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