राजनीति

बढता असंतोष : कॉग्रेसियों की पूछ-परख में अपनों की नाराजगी का शिकार हो रही है भाजपा

  • कांग्रेसियों की दम पर सत्ता हासिल करने वाली भाजपा को इन दिनों कांग्रेस से आने वाले नेता और विधायक ज्यादा रास आ रहे हैं। ऐसे में वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित रहे भाजपाई अपनी उपेक्षा और राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित नजर आने लगे हैं। वे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। लेकिन भाजपा के लिए पार्टी के भीतर पनप रहे असंतोष को दबाना मुश्किल हो रहा है। समय रहते पार्टी इसमें सफल नहीं हुई तो आने वाले विधानसभा के उपचुनाव में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है

    भोपाल। सूबे की सियायत में इन दिनों शह और मात का खेल चल रहा है। बेशक भाजपा ज्योतिरादित्य सिंधिया के माध्यम से प्रदेश की सत्ता हासिल करने में कामयाब हो गई हो लेकिन अब उसके लिए अपनों को साधना और मनाना भारी पड़ रहा है। एक ओर कांग्रेसी विधायक इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं तो दूसरी ओर पुराने भाजपाई किसी न किसी बहाने अपनी नाराजगी जाहिर करने में जुटे हैं। भाजपा राज्य विधानसभा की 26 सीटों पर उपचुनाव की तैयारी कर रही है, मगर शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जहां से पुराने भाजपाइयों के असंतोष और नाराजगी के सुर सनाई न दे रहे हों। पार्टी का प्रदेश नेतृत्व इस असंतोष को दबाने के लिए लगातार पहल कर रहा है बावजूद इसके अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पा रहा है।
    जय सिंह ने खुलकर जताई नाराजगी
    ग्वालियर में साडा के अध्यक्ष रहे और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के खास माने जाने वाले जय सिंह कुशवाह भी इन दिनों पार्टी के क्रिया कलापों से नाराज चल रहे हैं। कुशवाह तो भोपाल में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह भी मुलाकात कर चुके हैं। मीडिया में खबर आते ही भाजपा सत्ता और संगठन की नींद टूटी। इसके साथ ही उन्हें मनाने का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने उन्हें भोपाल आने का आग्रह किया। मंगलवार को इनकी चर्चा होगी। जय सिंह ने स्पष्टतौर पर कह दिया है कि भाजपा ने उनके समर्पण और निष्ठा को देखते हुए उचित मान-सम्मान नहीं दिया तो उनके सामने और भी विकल्प हैं। वे ग्वालियर पूर्व विधानसभा से चुनाव लड़ना चाहते हैं।
    शिवराज के मनाने पर नहीं माने शेजवार
    राज्य के रायसेन जिले के सांची क्षेत्र में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। कमल नाथ की सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए डॉ. प्रभुराम चौधरी 2018 में सांची विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। प्रभुराम ने तब भाजपा के मुदित शेजवार को हराया था। मुदित पूर्व नेता प्रतिपक्ष गौरीशंकर शेजवार के पुत्र हैं। अब प्रभुराम चौधरी को शिवराज सरकार में मंत्री बना दिया गया है। उनको मंत्री बनाए जाने से पहले ही गौरीशंकर और मुदित की टीस सार्वजनिक हुई थी। यही वजह रही कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा रायसेन में शेजवार को मनाने पहुंचे। शेजवार और प्रभुराम का मिलन हुआ और लगा कि सब कुछ ठीक हो गया। पूर्व मंत्री और रायसेन जिले के ही विधायक रामपाल सिंह गत दिवस सांची में बैठक लेने गए तो गौरीशंकर शेजवार और मुदित शेजवार इस बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे यह स्पष्ट हो गया कि दोनों नाराज हैं और इसका असर उपचुनाव के नतीजे पर पड़ेगा।
    कांग्रेस से हारे भाजपाइयों के तीखे तेवर
    शेजवार परिवार की नाराजगी यह भी है कि 2018 में जो कार्यकर्ता भितरघात कर मुदित को चुनाव हराने में सक्रिय थे उन्हें ही चुनाव प्रबंधन से लेकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा रही है। खास बात यह भी कि शिवराज चौहान को शेजवार की पत्नी राखी बांधती हैं और इतना मधुर रिश्ता होने पर भी उनका प्रयास कारगर नहीं हुआ।
    पवैया, शेखावत, जोशी भी नाराज
    आपको बता दें कि जय सिंह और शेजवार ही नहीं बल्कि 2018 में कांग्रेस से हारे कई भाजपाई भी नाराज चल रहे हैं। ग्वालियर में पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया, बदनावर में पूर्व विधायक भंवर सिंह शेखावत और हाट पीपल्या में दीपक जोशी किसी न किसी बहाने अपनी नाराजगी दिखा चुके हैं। दबी जुबान से और भी क्षेत्रों में इस तरह के मतभेद सामने आए हैं।जबकि मुरैना जिले की तीन सीटों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से असंतोष बना हुआ है। सुमावली में तो भाजपा का चुनाव लड़ चुके प्रत्याशी ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। मुरैना में राजौरिया बसपा के हाथी पर सवार हो गए हैं। दिमनी में भी अभी कुछ होने की संभावना दिख रही है।

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