राजनीति

मुखर्जी का जीवन और बलिदान युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा : जय सिंह

‘‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों ने जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश रची थी। जिसे पंडित मुखर्जी के सर्वोच्च बलिदान ने नाकाम कर दिया था। इसे उनका साहस ही कहा जाएगा कि उन्होंने अपने जीवन को खतरे में डालकर जम्मू कश्मीर में प्रवेश की अनुमति प्रणाली को अस्वीकार कर दिया और उन्होंने राष्ट्र हित के खातिर स्वयं को बलिदान कर दिया।’’ मोदी सरकार ने साहसी कदम उठाते हुए कश्मीर से धारा 370 को हटाकर उनके बलिदान को सार्थक कर दिया : जय सिंह 

भाजपा ने बलिदान दिवस के रूप में मनाई पंडित श्यामा प्रसाद की पुण्यतिथि, फूलबाग स्थित प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि

ग्वालियर। भारतीय जनता पार्टी की नगर इकाई ने मंगवार को जनसंघ के संस्थापक पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि बलिदान दिवस के रूप में मनाई। इस दौरान सैकड़ों भाजपाईयों ने फूलबाग चौराहा स्थित मुखर्जी की प्रतिमा पर साडा के पूर्व अध्यक्ष जय सिंह कुशवाह के नेतृत्व में सामूहिक रूप से पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि व्यक्त की।
राष्ट्र विरोधी ताकतों से नहीं मानी हार
इस मौके पर उपस्थित भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जय सिंह कुशवाह ने कहा कि ‘‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों ने जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश रची थी। जिसे पंडित मुखर्जी के सर्वोच्च बलिदान ने नाकाम कर दिया था। इसे उनका साहस ही कहा जाएगा कि उन्होंने अपने जीवन को खतरे में डालकर जम्मू कश्मीर में प्रवेश की अनुमति प्रणाली को अस्वीकार कर दिया और उन्होंने राष्ट्र हित के खातिर स्वयं को बलिदान कर दिया।’’ मोदी सरकार ने साहसी कदम उठाते हुए कश्मीर से धारा 370 को हटाकर उनके बलिदान को सार्थक कर दिया। श्री कुशवाह ने कहा कि मौजूदा टिकटॉक और फेसबुक की दुनिया के युवाओं के साथ ही पार्टी से जुड़े निष्ठावान एवं समर्पित कार्यकर्ताओं को मुखर्जी के जीवन और उनके योगदान से प्रेरणा लेनी चहिए।
बेकार नहीं जाएगा बलिदान
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष देवेश शर्मा ने कहा कि 23 जून को 1953 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हुई थी। जबकि 22 जून को डा. मुखर्जी की तबियत बिगड़ गई थी। उनकी आकस्मिक मृत्यु की खबर सुन कर देश में आंदोलन हुआ, यह प्रश्न उठा कि जिन डा. मुखर्जी ने अच्छी सेहत के साथ जम्मू में प्रवेश किया था, उनका एकाएक निधन कैसे हो गया? उस समय की सरकार ने राष्ट्र विरोधी ताकतों का साथ दिया, जांच नहीं कराई गई और हमारी पार्टी की आवाज को दबा दिया गया। लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। मोदी सरकार ऐसी ताकतों को ठिकाने लगाने में लगी हुई है। ताकि देश का वैभव कायम रहे और मुखर्जी के बलिदान को भुलाया न जा सके।
इन्होने अर्पित की श्रध्दांजलि 
जय सिंह कुशवाह, देवेश शर्मा, नगर निगम के पूर्व सभापति बृजेंद्र सिंह जादौन, पूर्व महामंत्री शरद गौतम, महेश उमरैया, अशोक जादौन बाबा, रामेश्वर भदोरिया, सोनू मंगल, वेद प्रकाश शिवहरे, रमेश पठारिया, राजकुमार परमार, सत्येंद्र सिंह रायखेड़ा, आफाक कुरेशी, भरत दांतरे, युवा मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष विवेक शर्मा, सुभाष शर्मा, हरिओम झा, एवं दीपक मोदगिल सहित करीब दो सैकड़ा कार्यकर्ता मौजूद थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *