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शिवराज सरकार के कैबिनेट विस्तार की राह में रोड़ा बनी “डील” की यह है हकीकत ?

  • 100 दिन बाद मतलब  तीन महीने बीत जाने के बावजूद मध्य प्रदेश में शिवराज की कैबिनेट का  विस्तार नहीं हुआ है। दिल्ली में माथापच्ची के बाद भी कैबिनेट विस्तार को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। कैबिनेट का विस्तार लगातार उलझता ही जा रहा है। जानिये क्या है इसकी असली वजह और कहाँ फँसा है मामला ?

    भोपाल
    शिवराज कैबिनेट का विस्तार फिर से टल गया है। जानकारी के अनुसार अभी कई चीजों लेकर मामला उलझा हुआ है। मीडिया फ्रेंडली शिवराज अभी मौन हैं। दिल्ली से लौटने के बाद मंगलवार शाम को सिर्फ इतना कहा है कि 1 जुलाई को कैबिनेट का विस्तार नहीं होगा। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार अभी कैबिनेट विस्तार में कई पेंच है। पार्टी आलाकमान शिवराज के पुराने साथियों को कैबिनेट में शामिल नहीं करना चाहता है।
    दो उप मुख्यमंत्री : इसके साथ ही शिवराज सरकार में दो उप मुख्यमंत्री को लेकर भी मामला उलझ गया है। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और सिंधिया के करीबी तुलसी सिलावट उप मुख्यमंत्री के दावेदार हैं। नरोत्तम मिश्रा अभी दिल्ली में कैंप किए हुए हैं और पार्टी के बड़े नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में 22  पूर्व  विधायकों के साथ आने के वक्त दो उप मुख्यमंत्री को लेकर वादा किया था। इसके साथ ही केंद्रीय नेतृत्व शिवराज कैबिनेट में युवा चेहरों को मौका देना चाहती है। ऐसे में शिवराज की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
    खाली हाथ लौटे शिवराज
    दो दिन के दिल्ली दौरे के बाद सीएम शिवराज सिंह बीते रोज को भोपाल लौट आए हैं। दिल्ली दौरे के दौरान बीजेपी के केंद्रीय नेताओं के साथ शिवराज चौहान ने कई मीटिंग की है। साथ ही पीएम मोदी से भी मुलाकात की है। भोपाल में मंगलवार की शाम उन्होंने कहा कि एक  जुलाई को कैबिनेट का विस्तार नहीं होगा। लेकिन जल्द ही हो जाएगा। बुधवार को प्रभारी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भोपाल आ सकती हैं।
    जानिये कहाँ फँसा है पेंच
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने कैंप से एक उप मुख्यमंत्री और 11 मंत्री चाहते हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर बीजेपी ने दो उप मुख्यमंत्री के फॉर्मूला को नकार दिया है ? प्रदेश के एक सीनियर नेता ने देश के प्रतिष्ठित समाचार- पत्र को कहा है कि कैबिनेट में दो उप मुख्यमंत्री को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है।वहीं, पार्टी नेतृत्व शिवराज कैबिनेट में नए चेहरों को मौका देना चाहती है। क्योंकि 2018 के विधानसभा चुनाव में 17 कैबिनेट मंत्री चुनाव हार गए थे। उसके बाद हम उन्हें इग्नोर नहीं कर रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व के साथ भी बातचीत के दौरान उन नामों पर चर्चा हुई है, जो शिवराज कैबिनेट में 3 बार से मंत्री रहे हैं।

  • 12 चेहरों पर तैयार नहीं
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीएम शिवराज सिंह चौहान पुराने चेहरों को ही कैबिनेट में रिपीट करना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व उनमें से 12 लोग को ड्रॉप करना चाहता है। इसमें ज्यादातर ऐसे लोग हैं, जो 3 बार मंत्री रह चुके हैं। वहीं, कई ऐसे विधायक हैं, जिन्हें कभी कैबिनेट में मौका नहीं मिला है।
    इस बीच पार्टी के सीनियर नेता गोपाल भार्गव ने तीखा रिएक्शन दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करना अच्छी बात नहीं हैं। बीजेपी वहीं कर रही है, जो पूर्व में कांग्रेस कर चुकी है। वे लोग केंद्रीय फॉर्म्युला को राज्य में नहीं लागू कर सकते हैं।nbt|

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