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BSP ने बढ़ाई टेंशन तो कमलनाथ ने सिंधिया को घेरने के लिए तैयार किया ‘स्पेशल प्लान’!

  • अक्टूबर में एमपी में उपचुनाव होने की संभावना है। उपचुनाव के लिए बीएसपी ने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। बीएसपी से सबसे ज्यादा टेंशन कांग्रेस को है। ऐसे में ग्वालियर-चंबल इलाके में ज्योतिरादित्य सिंधिया को घेरने के लिए कमलनाथ ने स्पेशल प्लान तैयार किया है।

    भोपाल
    एमपी में 27 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। जिसको लेकर बीजेपी-कांग्रेस ने मोर्चा संभाला लिया है। दोनों राजनीतिक दल एक-दूसरे पर लगातार जुबानी हमले बोल रहे हैं। ग्वालियर-चंबल की 16 सीटों पर उपचुनाव होने हैं,

    ———||| हाइलाइट्स: |||———-
    एमपी में 27 सीटों पर उपचुनाव को लेकर तैयारी तेज
    बीएसपी ने 8 सीटों पर उतारे उम्मीदवार, कांग्रेस ‘बेचैन’
    संघ मुख्यालय जाने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमलावर कांग्रेस
    ग्वालियर-चंबल में सिंधिया को घेरने कमलनाथ ने बनाया स्पेशल प्लान

    जिस कारण बीजेपी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव में शिवराज सिंह चौहान के साथ प्रमुख चेहरा बनाया है। वहीं, कांग्रेस लगातार सिंधिया पर हमले कर रही है। इस बीच पूर्व सीएम कमलनाथ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को घेरने के लिए स्पेशल प्लान तैयार किया है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया जब से संघ मुख्यालय गए हैं, उसके बाद से कांग्रेस उन्हें लगातार निशाने पर ले रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को कमलनाथ ने संबोधित करते हुए कहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को दलित विरोधी नेता के रूप में प्रचारित किया जाए। सिंधिया के संघ दौरे पर हमला करते हुए कमलनाथ ने कहा- सिंधिया अब बीजेपी नेताओं के घर और संघ के पास जा रहे हैं और ये दोनों ही दलित विरोधी है। ऐसे में सिंधिया की छवि को दलित विरोधी बता कर प्रचारित किया जाए।

ग्वालियर-चंबल में सिंधिया का वर्चस्व
उपचुनाव की सबसे ज्यादा सीटें ग्वालियर-चंबल में ही हैं। 27 में 16 सीटें वहीं हैं। गुना-शिवपुरी में दलित अत्याचार के कुछ मामले भी हाल ही में सामने आए हैं। इन इलाकों में ज्योतिरादित्य सिंधिया का वर्चस्व है। 2018 के विधानसभा चुनाव की बात की जाए, तो सिंधिया ने इन क्षेत्रों में ताबड़तोड़ चुनावी सभा और रैलियां की थी। जिस कारण कांग्रेस को ग्वालियर-चंबल अंचल में 34 से 26 सीटों पर जीत मिली थी। लेकिन सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बात अब कांग्रेस ग्वालियर-चंबल में मुश्किलों का सामना कर रही है क्योंकि इस क्षेत्र में कांग्रेस के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है।
दलित वोटों का है प्रभाव
जिन 16 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनमें से ज्यादातर सीटों पर दलित वोटरों का प्रभाव है। ऐसे में कांग्रेस इस क्षेत्र में ज्योतिरादित्य सिंधिया की छवि को दलित विरोधी बताकर दलित वोटरों को अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटी है। 2018 के विधानसभा चुनाव में दलित वर्ग ने कांग्रेस को वोट किया था लेकिन 6 महीने बाद हुए लोकसभा चुनाव में ये दलित वोटर कांग्रेस से फिसल कर बीजेपी के पाले में चले गए थे। ऐसे में कांग्रेस एक बार फिर से दलित वोटरों को साधने की कोशिश में जुट गई है।

बीएसपी ने बढ़ा दी है टेंशन
कांग्रेस के लिए इस बार दूसरी मुसीबत यह है कि बीएसपी ने इन सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। ग्वालियर के 16 में से 8 सीटों पर बीएसपी ने अपने उम्मीदवार भी घोषित कर दिए हैं। इन इलाकों बीएसपी का अच्छा-खासा वोट बैंक हैं। बीएसपी के मैदान में उतरने से दलित वोटों का बंटवारा होगा। ऐसे में कांग्रेस के लिए ही ज्यादा चिंता की बात है। इसके साथ ही कमलनाथ भी पार्टी की छवि बदलने के लिए सॉप्ट हिंदुत्व की राह पर चल रहे हैं।

कांग्रेस के लिए यहीं है मौका
15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस की सरकार 15 महीने में ही गिर गई है। कांग्रेस के पास उपचुनाव के जरिए फिर से सत्ता में वापसी के लिए मौका है। अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर 3 साल इंतजार करना होगा। पीसीसी कार्यालय में जिला प्रभारियों की बैठक में पूर्व सीएम ने कहा कि ये उपचुनाव एमपी के भविष्य का चुनाव है। कमलनाथ ने जिला प्रभारियों को सर्वे रिपोर्ट सौंपते हुए बताया था कि किस बूथ पर पार्टी कमजोर है और किस बूथ पर मजबूत। कमलनाथ ने कहा था कि हमारा मुकाबला बीजेपी संगठन से है। बीजेपी ने यूपी में बसपा और सपा को घर बैठा दिया है। जबकि हमारे प्रभारियों को ब्लॉक और मंडल की भी जानकारी नहीं है।(nbt)

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