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फजीहत : भाजपा में बच्चा बन गए हैं सिंधिया, कांग्रेस ने उठाए “महाराज” की हैसियत पर सवाल

  • भाजपा के एक पोस्टर में तुलसी राम सिलावट के नीचे ज्योतिरादित्य सिंधिया की फोटो लगाए जाने कांग्रेस ने महाराज की हैसियत पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने कहा है कि क्या भाजपा में जाने के बाद बच्चा बन गए हैं सिंधिया? क्योंकि पोस्टर में उनकी फोटो को कैलाश विजयवर्गीय के बेटे के साथ लगाया गया है।

    राजनीतिक संवाददाता। भाजपा का एक पोस्टर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जो कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पोस्टर को देखकर कांग्रेस ने एक बार फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया की हैसियत पर निशाना साधा है और सवाल भी किया है। प्रदेश में होने वाले उप चुनाव के लिए सांवेर विधानसभा क्षेत्र में लगाए गए पोस्टर में सिंधिया की फोटो भी लगाई गई है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि सबसे नीचे। और तो और वह भी बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विधायक बेटे आकाश विजयवर्गीय के साथ। जबकि कैलाश विजयवर्गीय और तुलसी राम सिलावट को उनसे ऊपर रखा गया है।
    सिंधिया की पुरानी फोटो का इस्तेमाल
    ताज्जुब की बात यह भी है कि पोस्टर में सिंधिया की पुरानी फोटो इस्तेमाल की गई है। इस फोटो में सिंधिया के गले में कांग्रेस पार्टी के प्रतीक दुपटृटा है। पोस्टर में भाजपा कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में सांवेर आने की अपील की गई है जिससे क्षेत्र में पार्टी की जीत सुनिश्चित हो सके।

    क्या यही है महाराज की हैसियत?
    पोस्टर के सामने आते ही कांग्रेस समर्थकों ने बीजेपी में सिंधिया की हैसियत को लेकर हमला बोलना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा कि बीजेपी में महाराज की यही हैसियत रह गई है? कि उन्हें बच्चों के साथ जगह दी गई है। कुछ लोगों ने सीधे तौर पर भाजपा के रवैये पर यह लिख सवाल उठाए हैं कि लगता नहीं पार्टी ने सिंधिया को उनकी हैसियत के हिसाब से स्थान दिया है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने ट्विटर के जरिए सिंधिया की हैसियत पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि उसूलों और सम्मान की बात करने वालों के सम्मान के साथ भाजपा में रोज खिलवाड़ हो रहा है।

    भाजपा में सिंधिया पर मतभेद!
    राजनीति से कुछ अन्य लोग इसे भाजपा के पुराने नेताओं और सिंधिया-समर्थकों के बीच कथित मतभेदों से भी जोड़कर देख रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा खुद दोनों गुटों के बीच की खाई को पाटने की कोशिशों में लगे हैं, लेकिन इस पोस्टर के बाद मतभेद की खबरों को और बल मिल रहा है। सोशल मीडिया के यूजर्स का कहना है कि “शिवराज भले कितनी भी कोशिशें कर लें, लेकिन टिकाऊ कभी भी बिकाऊ को अपने ऊपर बर्दाश्त नहीं करेगा।”
    अपने शहर में भी उपेक्षित
    पोस्टर का यह कोई नया मामला नहीं है, इससे पहले भी भाजपा के अनेक पोस्टरों में सिंधिया की फोटो तक नहीं लगाई गई थी। इसको लेकर कई स्थानों पर विवाद हो चुका है। सिंधिया के अपने ही गृह नगर ग्वालियर में भाजपा की होर्डिंग्स से उनकी फोटो गायब रहने की भी खूब चर्चा हुई थी। नए पोस्टर में सिंधिया की इस तरह फोटो लगाने के बावजूद यह एक नए विवाद को जन्म देता दिख रहा है। इस तहर के पोस्टर वायरल होने के बावजूद सिंधिया समर्थकों की खामोशी चर्चा का विषय बनी हुई है।


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