राजनीति

पूर्ववर्ती कमल नाथ सरकार के फैसलों में कोई भी गलती नहीं निकाल पाई शिवराज सरकार

  • मुख्यमंत्री ने डॉ. मिश्रा सहित जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और कृषि मंत्री कमल पटेल की समिति बनाई थी। समिति को 20 मार्च से छह माह पहले तक कमल नाथ सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों की समीक्षा करने के लिए कहा गया था।

    भोपाल। मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्ववर्ती कमल नाथ सरकार के फैसलों की समीक्षा करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीन मंत्रियों की जो समिति बनाई थी, उसे निरस्त कर दिया है। समिति ने तीन-चार बैठक करके विभिन्न विभागों से जुड़े निर्माण कार्यो की निविदा, कर्जमाफी सहित अन्य मुद्दों पर विचार किया था। पिछले साल की वेयर हाउस स्तर पर हुई गेहूं खरीदारी और कर्जमाफी को लेकर भी जानकारियां मांगी गई थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

प्रदेश के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ मंत्रियों की बैठक में कमल नाथ सरकार के फैसलों की समीक्षा करने का मुद्दा उठाया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने डॉ. मिश्रा सहित जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और कृषि मंत्री कमल पटेल की समिति बनाई थी। समिति को 20 मार्च से छह माह पहले तक कमल नाथ सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों की समीक्षा करने के लिए कहा गया था। समिति ने विभिन्न विभागों द्वारा निर्माण कार्यो के टेंडर और कर्जमाफी को लेकर अधिकारियों से जानकारियां लीं। इस दौरान ही गृह और कृषि मंत्री ने कांग्रेस सरकार पर किसानों को कर्जमाफी के नाम पर धोखा देने के आरोप लगाए। कृषि मंत्री ने तो किसानों से यह अपील भी की कि वे तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ के खिलाफ पुलिस थानों में एफआइआर दर्ज कराएं। इसके साथ ही वेयर हाउस स्तर पर हुई गेहूं की खरीद में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए गए। कृषि मंत्री ने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी पर इस मामले में भी अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

अब अलग-अलग समितियां देखेंगी मामले
समिति के सामने संबल योजना में कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए बदलाव का मुद्दा भी सामने आया था। सूत्रों का कहना कि समिति के सामने जितने भी नीतिगत मामले आए थे, उन्हें मुख्यमंत्री को अवगत कराया जा चुका है। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब विभिन्न मामलों को देखने के लिए अलग-अलग मंत्रिमंडलीय समितियां गठित हो गई हैं। ऐसे में अब एक समिति की जरूरत नहीं रह गई थी, इसलिए पिछली सरकार के फैसलों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही आर्थिक मामलों को देखने के लिए गठित समिति भी निरस्त कर दी गई है। इसे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ राजस्व बढ़ाने के उपाय सुझाने का जिम्मा दिया गया था। इसमें डॉ. मिश्रा के अलावा तत्कालीन खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और आदिम जाति कल्याण मंत्री मीना सिंह को सदस्य बनाया था।

परिषद निरस्त करने का आदेश पलटा
शिवराज सरकार पूर्ववर्ती कमल नाथ सरकार के कई आदेशों को पलट चुकी है। इसमें 22 नगर परिषदों के गठन की अधिसूचना को निरस्त करने का मामला भी शामिल है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने पिछले दिनों ही इस अधिसूचना को फिर से जारी करके परिषद के गठन को मंजूरी दी है। इसके साथ ही संबल योजना को फिर से प्रभावी तरीके से लागू करने का फैसला भी शामिल है। कांग्रेस सरकार में यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी।

(jagran)

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