राजनीति

पूर्व विधायक ने समारोह पूर्वक कार्यक्रम में बॉंटे चेक …सबसे बड़ा सवाल-किसने दी इन्हें अनुमति ?

  • सूबे की सियासत में सत्ता और संगठन के बीच अनेक रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह ने लॉकडाउन के चलते करीब एक महीने तक अपने मंत्रिमंडल का गठन नहीं किया और मजबूरी में करना ही पड़ा तो महज पॉंच मंत्री ही बनाए। लेकिन कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा के आंगन में आने वाले एक पूर्व विधायक ने कार्यक्रम आयोजित कर समारोह पूर्वक लोगों को आर्थिक सहायता के चेक बॉटने के साथ ही खाद्यान तक प्रदान किया। इस आयोजन ने भाजपा और उनके कर्ताधर्ताओं को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है। सबसे महत्वपूर्ण क्या लॉकडाउन इनके लिए कोई मायने नहीं रखता है? आयोजन की अनुमति किसने दी? और सबसे बड़ा सवाल यह कि, क्या एक पूर्व विधायक अपनी विधायकी से इस्तीफा देने के 37 दिन बाद विधायक निधि से आर्थिक सहायता बॉट सकता है? जी, हॉं…. इन्हीं सवालों और पूर्व विधायक द्वारा किए गए आयोजन की हम बात कर रहे हैं। तो आइए जानिए क्या है पूरा मामला?


    बात हो रही है ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र की। जहां सोमवार को लॉकडाउन के दौरान चेतकपुरी स्थित तोरण वाटिका में एक समारोह आयोजित किया गया। भाजपा सारवरकर मंडल के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 45, 56, 57, 58 व 59 के लोगों के लिए यहा इमदाद बॉंटी गई। पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल (कांग्रेस के बागी) और अब भाजपाई ने अपनी विधायकी से इस्तीफा देने के 37 दिन बाद विधायक निधि से 70 परिवारों को आर्थिक सहायता के चेक बॉंटे। …साथ ही उन्होंनें खाद्यान्न भी प्रदान किया। इस आयोजन में भाजपा के जिलाध्यक्ष देवेश शर्मा सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद थे।
    – हमने ली थी परमिशन
    इस बारे में जब ग्वालियर लाइव ने पूर्व विधायक मुन्नालाल से बात की तो उनका कहना था कि हमने प्रशासन से इसकी विधिवत परमिशन ली थी। रही बात चेक की, तो वो मेरे कार्यकाल के बने रखे हुए थे। मुझे समय नहीं मिल पाया इस कारण से बंट नहीं पाए। लेकिन क्या पूर्व विधायक होकर अब चेक बॉंटना उचित है ? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि इसमें बुराई क्या है? उन्होंने यह भी दावा किया कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ आयोजन किया गया। लेकिन नीचे लगा यह फोटो आपको बता रहा है कि कितना पालन हुआ?
    प्रशासन ने नहीं दिया कोई जवाब
    इस बारे में जानकारी लेने के लिए जब ग्वालियर कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को फोन लगाया तो उन्होंने उसे रिसीव नहीं किया। इसके बाद उन्हें मैसेज किया गया लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका कोई जवाब नहीं मिल सका। यदि जवाब मिलेगा तो हम आपको अवगत जरूर कराएंगे।
    पूर्व विधायक का कृत्य गैरकानूनी
    विधायक निधि के चेक बॉंटे जाने के मामले में जब विधि विशेषज्ञ और अनेक विधायक व पूर्व विधायकों से चर्चा की गई तो उनका भी यही कहना था कि एक पूर्व जनप्रतिनिधि या अपने पद से इस्तीफा दे चुका जन प्रतिनिधि पद जाने के बाद विधिवत रूप से आर्थिक सहायता के चेक नहीं बॉंट सकता है। यदी ऐसा करता है तो यह गैर कानूनी है और असंवैधानिक भी है। .. यहॉं सवाल यह भी उठता है कि यदि पुरान चेक भी रखे हुए थे, तो उन्हें जमा क्यों नहीं कराया गया? योजना मंडल ने एक-दो महीने पुराने चेक वितरण करने की अनुमति किस आधार पर दी?

    • Posted By : Vijay Pandey

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