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पंजाब केसरी के संपादक अश्वनी कुमार का निधन,पत्रकारों व नेताओं ने बताई अपूर्णीय क्षति

उत्तर भारत के सबसे पुराने और चर्चित समाचार पत्रों में से एक ‘पंजाब केसरी’ के निदेशक एवं संपादक अश्विनी कुमार चोपड़ा का शनिवार को आकस्मिक निधन हो गया। श्री चोपड़ा का निधन पत्रकार जगत के लिए बड़ी एवं अपूर्णीय क्षति है।

देश के हिंदी अखबारों में उनका दैनिक पत्र हमेशा उन खब रों को तवज्जो देता है, जो देश और राजनीति की दिशा तय करती हैं। पत्रकार से सांसद बने अश्विनी कुमार चोपड़ा अपने तल्ख अंदाज और सवालों के लिये पहचाने जाते थे। आज भी उनकी पत्रकारिता की धार को हर कोई मानता है। 

करनाल से जीते चुनाव                           

2014 के लोकसभा चुनाव में अश्विनी कुमार हरियाणा के करनाल से निर्वाचित होकर संसद में पहुंचे। लेकिन इससे भी पहले उनकी पहचान एक धारदार, निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकार की रही है। इतना ही नहीं वह एक ऐसे परिवार की विरासत संभाल रहे हैं जिसने पंजाब के आतंकवाद को अपने घर में भी झेला है।

आतंकवाद का शिकार हुआ परिवार     

आतंकवाद के दौर में आतंक के खिलाफ आवाज उठाने वाले पंजाब केसरी अखबार के संस्‍थापक, सम्पादक लाला जगतनारायण को आतंकवादियों ने गोलियों से भून डाला था। इसके बाद उनके बेटे रमेशचन्द्र की भी आतंकियों ने हत्‍या कर दी थी। तीसरी पीढ़ी के सबसे बड़े पुत्र के तौर पर अश्विनी चोपड़ा ने निर्भीक पत्रकारिता की विरासत अपने दादा और पिता से ही पायी है। दोनों ही हिंद समाचार से जुड़े थे जो खुले तौर पर आतंकवाद का विरोध करने वाले अखबारों में शामिल था। जब पंजाब आतंकवाद की आग में जल रहा था, उसी दौरान पंजाब केसरी अस्तित्व में आया जो पत्रकारों और कार्यकर्ताओं द्वारा एक अभियान के माध्यम से आतंकवाद को रोकने के लिए अपनी आवाज उठाता था। उस दौर में पंजाब केसरी को आमतौर पर शहीद पत्रकारों का समाचार पत्र कहा जाता है। अश्विनी चोपड़ा भारत के इसी प्रमुख हिंदी दैनिक समाचारपत्र पंजाब केसरी के निदेशक एवं संपादक थे।

पत्रकारिता में हासिल की थी मास्टर डिग्री।     

गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से स्नातक होने के बाद अश्विनी चोपड़ा ने पंजाब विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की, लेकिन पत्रकारिता का अध्ययन गहराई से करने की उनकी ललक ने उनको यही रूकने नहीं दिया। यही कारण है कि आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने कैलिफोर्निया के बर्कले विश्वविद्यालय का रूख किया और यहीं से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल की। इस कोर्स के बाद उन्होंने अपने दादा और पिता के मार्गदर्शन में पत्रकारिता में कदम रखा। पत्रकारिता की शुरूआत उन्होंने सैन फ्रांसिस्को से निकलने वाले अखबार क्रॉनिकल से की और 6 महीने वहां काम किया। इस दौरान उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा। इसके बाद वह दिल्ली लौटे। हालांकि वे खुद एक बड़े अखबार के मालिक के पुत्र थे, लेकिन काम सीखने के लिये उन्होंने द टाइम्स ग्रुप ज्वाइन किया। उसके बाद वह पंजाब केसरी से जुड़े। पंजाब केसरी उत्तर भारत का प्रमुख हिन्दी दैनिक समाचार पत्र है। उन्होंने आज तक किसी भी गलत बात को बर्दाश्त नहीं किया। अश्विनी चोपड़ा अपने दैनिक अखबार के एक बोल्ड लेखक भी हैं और अपने राजनेताओं के खिलाफ भी विरोधी शब्द लिखने से परहेज नहीं करते। उन्हें पंजाब केसरी अखबार के विशेष संपादकीय की वजह से भी पहचाना जाता है। एक आला दर्जे के पत्रकार और अब पॉलिटिशियन बने अश्विनी चोपड़ा एक अच्छे क्रिकेटर भी रहे हैं। उन्होंने पूर्णकालिक पत्रकारिता में प्रवेश करने से पहले रणजी ट्राफी में पंजाब के लिए अश्विनी मिन्ना के नाम से क्रिकेट भी खेला है। 1975-76 और 1979-80 के बीच उन्होंने लगभग 25 प्रथम श्रेणी के मैच खेले। वे एक लेग स्पिनर थे। खास बात यह है 1975-76 के ईरानी ट्रॉफी मैच के दौरान अश्विनी मिन्ना ने सुनील गावस्कर का पहला प्रथम श्रेणी का विकेट लिया था। पत्रकारिता के लिये उन्हें सैकड़ों सम्मान व पुरस्कार मिल चुके हैं, लेकिन वे खुद उन्हें मिले अपार जन-समर्थन को अपना सबसे बड़ाा पुरस्कार मानते हैं जो उन्हें हरियाणा की जनता ने दिया। वे फ़िलहाल वह करनाल के लोकप्रिय सांसद हैं और आज उनकी यही कोशिश है कि जिस जनता ने उनको इतना प्यार दिया, उसके लिए हर जरुरी काम करें। हालांकि अपनी पत्रकारिता से वह अपनी सरकार को भी आइना दिखाने से बाज़ नहीं आते। उनका जज्बा यह साबित करता है कि एक पत्रकार मरते दम तक पत्रकार ही रहता है। फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2018 में अश्विनी कुमार चोपड़ा को मीडिया के एक प्रमुख सरताज के तौर पर पाया गया है।

सांसद शेजवलकर ने व्यक्त की संवेदना
करनाल लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद एवं पंजाब केसरी के प्रधाान सम्पादक अश्वनी कुमार चौपड़ा के आकस्मिक  निधन पर ग्वालियर सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने गहरा दुःख जताते हुए संवेदना व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर से मृतक आत्मा को शांति एवं शोक संतृप्त परिवार को धैर्य एवं साहस प्रदान करने की कामना की।

प्रेस क्लब पर हुई शोक सभा             

ग्वालियर प्रेस क्लब पर शोक सभा का आयोजन किया गया। अध्यक्ष राजेश शर्मा ने चौपड़ा जी कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। इस दौरान अनेक पत्रकारों ने उनको याद करते हुए  पत्रकारिता के क्षेत्र में दिए गए त्याग और योगदान का बखान करते हुए शोक व्यक्त किया। शोक व्यक्त करने वालों में सुरेश दंडौतिया, सुरेश शर्मा, सुरेंद्र माथुर, प्रदीप तोमर, जोगेंद्र सेन, गिरिराज त्रिवेदी एवं अजय मिश्रा सहित एक सैकड़ा पत्रकार मौजूद थे।

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