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मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार दिया…कोरोना की मार से सुधारों के सीतारामी प्रयास : राकेश अचल

  • देश में आर्थिक सुधारों का श्रीगणेश नया नहीं है. पीव्ही नरसिम्हाराव की सरकार के समय जिस वित्तमंत्री ने ये मनमोहक सुधार देश के सामने रखे थे वे ही डॉ मनमोहन सिंह बाद में दस साल तक देश के प्रधानमंत्री भी रहे .मै ये तो भविष्यवाणी नहीं कर सकता की डॉ मनमोहन सिंह की ही तरह आने वाले वर्षों में आर्थिक सुधारों की घोषणा करने वाली हमारी वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण भविष्य की प्रधानमंत्री होंगी ,लेकिन मै उन्हें शुभकामनाएं अवश्य दे सकता हूँ .की देर से शै उन्होंने कुछ कदम तो उठाये|………..त्वरित टिप्पणी |

पशोपेश में हूँ की कोविद-19 का आभार मानूँ या न मानूँ क्योंकि उसकी वजह स्व जहां देश ने एक महादुःस्वप्न देखा तो इसके साथ ही देश में आर्थिक सुधारों का दूसरा युग शरू भी हुआ है .पिछले दिनों प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट से ध्वस्त हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जिस 20 लाख करोड़ रूपये के आर्थिक पॅकेज का ऐलान किया था

डॉ. राकेश अचल,                            लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं 

उसी के तहत आज इन नए सुधारों का ऐलान किया गया है .सरकार ने इसी पॅकेज में से आठ क्षेत्रों में सुधार के जरिये लाखों नए रोजगारों के सृजन का सपना दिखाया है. सड़कों पर रोजगार गंवाकर मरते-गिरते आगे बढ़ रहे करोड़ों लोगों को शायद इससे कुछ राहत मिले .
देश में आर्थिक सुधारों का श्रीगणेश नया नहीं है. पीव्ही नरसिम्हाराव की सरकार के समय जिस वित्तमंत्री ने ये मनमोहक सुधार देश के सामने रखे थे वे ही डॉ मनमोहन सिंह बाद में दस साल तक देश के प्रधानमंत्री भी रहे .मै ये तो भविष्यवाणी नहीं कर सकता की डॉ मनमोहन सिंह की ही तरह आने वाले वर्षों में आर्थिक सुधारों की घोषणा करने वाली हमारी वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण भविष्य की प्रधानमंत्री होंगी ,लेकिन मै उन्हें शुभकामनाएं अवश्य दे सकता हूँ .की देर से शै उन्होंने कुछ कदम तो उठाये .
पिछले सत्तर साल की कहानी अब बासी पड़ चुकी है. अब पिछले छह साल की बात करना प्रासंगिक है. बीते छह साल में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने हदे से ज्यादा दुनिया घूम कर देश का डंका तो बजाय लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार दिया.नोटबंदी भी इसे सुधर नहीं पाई ,जीएसटी लागू करने से भी इसमें कोई ख़ास सुधार नहीं आया उलटे कोविद -19  अयाचित संकट ने इस बेपटरी अर्थ व्यवस्था का भट्टा ही बैठा दिया .54  दिन के लाकडाउन ने देश की अर्थव्यवस्था की पोल ही खोल दी .करोड़ों भारतीय आपने ही देश में प्रवासी घोषित कर दिए गए,उनके हाथ से रोजगार और मुंह से निवाला यकायक छीन लिया गया .आज जब आप इन नए सुधारों की खबर पढ़ रहे होंगे तब भी ऐसे असंख्य लोग सड़कों पर नंगे पांव घिसट कर अपनी जान बचने के लिए अपने घरों की और बढ़ रहे होंगे .

आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की चौथी किस्त की जानकारी देतेे हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कई सेक्टर की मजबूती के लिए नीतिगत बदलाव की जरूरत है. वित्त मंत्री ने 8 सेक्टर के लिए बड़े ऐलान किए. इन क्षेत्रों में माइनिंग, खनिज, विमानन और डिफेंस शामिल हैं.

सरकार की ओर से पहला बड़ा ऐलान कोयला क्षेत्र के लिए किया गया है. कोयला क्षेत्र में कॉमर्शियल माइनिंग होगी. सरकार का एकाधिकार ख्त्म होगा. कम कीमत पर ज्यादा कोयला मुहैया होगा. कोयला क्षेत्र के लिए 50 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे. माइनिंग लीज का ट्रांसफर हो सकेगा. 500 माइनिंग ब्लॉक की नीलामी होगी. वित्त मंत्री की ओर से दूसरा बड़ा ऐलान खनिज क्षेत्र के लिए किया गया. खनिज सेक्टर में विकास की नीति अपनाई जाएगी. माइनिंग और मिनरल सेक्टर में संरचनात्मक सुधार किया जाएगा. बॉक्साइट और कोयला के क्षेत्र में संयुक्त नीलामी का प्रावधान किया जाएगा.
तीसरा बड़ा ऐलान रक्षा क्षेत्र के लिए किया गया. वित्त मंत्री ने कहा, “रक्षा क्षेत्र में सरकार का ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर है. हमारी सेना को अत्याधुनिक हथियारों की जरूरत है. रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है. ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड का निगमीकरण किया जाएगा. ऑर्डिनेंस फैक्ट्री शेयर बाजार में लिस्ट होगी. कुछ हथियारों के आयात पर बैन लगेगा. आयात नहीं किए जाने वाले उत्पादों की लिस्ट बनेगी. रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी हथियारों के लिए अलग से बजट का प्रावधान होगा.”

चौथा बड़ा ऐलान विमानन क्षेत्र को लेकर किया गया. वित्त मंत्री ने कहा, “वर्ल्ड क्लास लेवल के एयरपोर्ट का विकास पीपीपी मॉडल से होगा. एयरस्पेस बढ़ाया जाएगा. अभी 60% एयरस्पेस खुला है. पीपीपी मॉडल से 6 एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे. एयरस्पेस बढ़ाने से आमदनी बढ़ेगी. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को 2300 करोड़ रुपया दिया जाएगा.

देखने में ये सुधार बड़े ही लुभावने हैं लेकिन यदि आप इनका विश्लेषण करेंगे तो पाएंगे की इन आर्थिक सुधारों से सड़क पर रेंगने के लिए मजबूर जनता के बजाय पिछले कुछ वर्षों में धनकुबेर बने लोगों का भला ज्यादा होगा .उनके भले में ही हमारा भला छिपा है .इन सुधारों के पीछे जो दबाब काम कर रहे हैं उनके बारे में विद्वान ही अपनी राय देंगे लेकिन हम जैसे आम नागरिक सिर्फ इतना समझ सकते हैं की इन तमाम आर्थिक सुधारों से निजी क्षेत्र एक बार फिर बलवान होगा और ये रक्षा तथा अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी सेंध लगाने में कामयाब रहेगा .
इन तमाम आर्थिक सुधारों से देश की अर्थव्य्वस्था को पटरी पर आ ही जाना चाहिए अन्यथा आने वाले चार साल में ये मौजूदा सरकार बेपटरी हो जाएगी .लेकिन जोखिमों का फायदा भी है और नुक्सान भी . भाजपा सरकार दोनों का आकलन कर चुकी है .उसे इस बात का प्रमाण मिल चुका है की भारतीयों का गला आप दम निकलने से थोड़ी देर पहले तक दबाये रख सकते हैं .वे बिलबिला सकते हैं लेकिन बगावत नहीं कर सकते और फिर जब आत्मनिर्भरता का छोंक लगा दिया गया हो तो फिर जनता के बाग़ी होने की गुंजाइश ही नहीं बचती .

  • आज घोषित किये गए आर्थिक सुधारों पर सियासत होना स्वाभाविक है,होना भी चाहिए अन्यथा जनता को सच का पता कैसे चलेगा लेकिन मै चाहता हूँ ,मै ही नहीं बल्कि हर भारतीय नागरिक चाहता है की देश की 130 करोड़ से आगे निकल चुकी आबादी को आने वाले वर्षों में कीड़े-मकोड़ों की तरह जीवन यापन न करना पड़े.

जब कभी कोविद जैसा कोई आक्रमण हो तो उसे अराजक,असहाय,अनाथ स्थितियों का सामना न करना पड़े .नए ऐलानों के बाद हमें अपना शेयर बाजार देखना होगा की कल उसमें उछाल आता है या नहीं ,क्योंकि सरकार के हर कदम का सीधा असर इसी बाजार पर देखने को मिलता है .भगवान करे की मोदी जी और उनकी सरकार जिस दिशा में आगे बढ़ रही है वो सुनहरे भविष्य की और ले जाने वाली हो .क्योंकि अब कोई भी विकास की अंधी सुरंग में नहीं जाना चाहता .

अभी समय ऐसा है जब संसद मौन है.सड़कें खामोश हैं इसलिए इन सुधारों के बारे में आम राय का पता नहीं चल सकता लेकिन आने वाले दिनों में इनका असर दिखना चाहिए. मुझे लगता है की ये सुधार जमीन पर आते-आते साल-छह माह तो ले ही लेंगे .तब तक मुमकिन है देश कोविद की त्रासदी से बाहर निकल आये और सब मिलजुल कर कारपोरेट होती सुरक्षा तथा निजी क्षेत्रों में जाते अंतरिक्ष और विमानन क्षेत्रों को भी बदलते देख सकें
@ राकेश अचल


Post By : Vijay Pandey 

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