राजनीति

दबदबा : शिवराज कैबिनेट में 40 फीसदी हिस्सेदारी से खिले सिंधिया समर्थकों के चेहरे

  • ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद शुरू हुआ अटकलों का दौर शिवराज के कैबिनेट विस्तार के बाद लगता है अब खत्म हो जाएगा। मंत्रिमंडल में सिंधिया समर्थकों की भागीदारी ने उनके विरोधियों की बोलती बंद कर दी है। साथ ही सिंधिया ने अपनी धमाकेदार पारी की शुरूआत करते हुए मंत्रिमंडल विस्तार से इस बात का भी आगाज करा दिया है कि भाजपा और सिंधिया अब एक हैं। राजमाता विजयाराजे सिंधिया की तरह अब पार्टी में भी उनका बोलबाला होगा!

    शिवराज सरकार के बहुप्रतिक्षित कैबिनेट विस्तार के पूरा होते ही मध्य प्रदेश की राजनीति के नए समीकरण उभर कर सामने आए हैं। कारण स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकार को गिराने और शिवराज को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा ने खासी तवज्जो देकर उनका मान बढ़ाया है। शिवराज कैबिनेट में 33 में से सिंधिया के साथ आने वाले 14 पूर्व विधायकों की भागीदारी ने सत्ता में उनकी 40 फीसदी की हिस्सेदारी कर दी है। ऐसे में सिंधिया को निकट भविष्य में पार्टी में दबदबा बढ़ना लाजमी है। ऐसे में माना जा रहा है कि वे अपनी दादी राजमाता विजयराजे सिंधिया की तर्ज पर ही राजनीतिक प्रभाव छोड़कर अपना रुतबा कायम करेंगे!
    राजनीतिक विश्लेषकों एवं सिंधिया परिवार से जुड़े लोगों की मानें तो आने वाले समय में सिंधिया की पार्टी में उपयोगिता बढ़ेगी और साथ ही उनका प्रभाव। सिंधिया के स्थानीय जनसंपर्क अधिकारी डॉ.केशव पाण्डेय का कहना है कि अपने स्वाभिमान की रक्षा की खातिर वर्ष 1967 में जिस तरह राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने डीपी मिश्र के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को अपदस्थ कर दिया था। उसके बाद उन्होंने जनसंघ में अपना मजबूत आधार बनाकर उसके बाद भाजपा को नई पहचान दी। समय के साथ भाजपा और राजमाता एक दूसरे के पूरक हो गए थे और उनकी मर्जी के बिना कोई बड़ा निर्णय संभव नहीं था।
    डा. पाण्डेय ने कहा कि वक्त ने एक बार फिर अपने आप के दोहराया। ज्योतिरादित्य ने भी जनसेवा के संकल्प को पूरा करने के लिए कमलनाथ की सरकार को उखाड़ फैंका और फिर अपनी दादी द्वारा स्थापित की गई पार्टी को ही अपनी जनसेवा का माध्यम बनाया है। इस लिहाज से देखा जाए तो भविष्य में सिंधिया की पार्टी में उपयोगिता भी बढ़ेगी और उनका प्रभाव भी। ऐसे में उनका दबदबा होना स्वाभाविक है।
    …. अब विभागों के बंटबारों पर होगा फोकस
    सिंधिया, शिवराज मंत्रिमंडल में तो अपने समर्थकों को मनचाही हिस्सेदारी दिलाने में तो कामयाब हो गए हैं, लेकिन असली परीक्षा होना अभी बाकी हैं। क्योंकि कमलनाथ सरकार में सिंधिया के समर्थकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और महिला एवं बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग मिले थे। अब सबकी निगाहें विभागों के बंटवारें पर टिकी हुई हैं। देखना यह होगा कि शिवराज अब सिंधिया समर्थकों कौ कौन-कौन से विभागों की जिम्मेदारी सौंपते हैं। सूत्रों की मानें तो कहा जा रहा है कि आधा दर्जन मंत्रियों को दमदार विभाग मिलने की संभावना है। सिंधिया इस बारे में पहले ही पार्टी आलाकमान को अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं।

  • Posted By : विजय पाण्डेय 

  • यह भी पढिये 

  • बढ़ा_प्रभाव : शिव के “राज” में सिंधिया की “सरकार”, ग्वालियर-चंबल अंचल हुआ असरदार,12पूर्व कांग्रेसियों की आई बहार || 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *