राजनीति

प्रतिष्ठा का सवाल : सत्ता और संगठन में अपने विरोधियों को साधने में जुट गए हैं सिंधिया ?

  • ज्योतिरादित्य सिंधिया मंगलवार को मध्य प्रदेश के दौरे पर आए थे। इस दौरान भोपाल में उमा भारती और हाटपिपल्या में पूर्व मंत्री दीपक जोशी से मुलाकात की। नेता भले ही इस मुलाकात को सामान्य कह रहे हों, लेकिन इसके खास सियासी मायने हैं।

    भोपाल। राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया मंगलावर की सुबह भोपाल पहुंचे थे। एयरपोर्ट से सीधे वह पूर्व सीएम उमा भारती के घर पहुंचे गए थे। उमा भारती के घर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उनका भव्य स्वागत हुआ। उसके बाद सिंधिया, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हाटपिपल्या गए। वहां पूर्व मुख्यमंत्री कैलाशी जोशी की प्रतिमा का अनवारण किया। इस मौके पर उनकी जमकर तारीफ की। इन दो दौरे में ही ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक मिशन छिपा हुआ है।
    सियासी जानकार मानते हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के इन दौरों का मकसद और उनका मिशन ही था। दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में आने के बाद से पार्टी के कुछ नेता नाराज चल रहे थे। कैबिनेट विस्तार के बाद उनकी नाराजगी बढ़ गई थी। नाराज लोगों की सूची में दिग्गज से लेकर उपचुनाव वाले क्षेत्रों के नेता शामिल हैं। भोपाल दौरे के दौरान सिंधिया ने बीजेपी के इन दो दिग्गजों को साधने की कोशिश की है।

    उमा भारती थीं नाराज
    दरअसल, कैबिनेट विस्तार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने नाराजगी व्यक्त की थीं। उन्होंने कहा था कि मेरे सुझाव को पार्टी ने दरकिनार कर दिया है। इसे लेकर उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को एक चिट्ठी लिखी थी। उमा नाराज इस बात को लेकर भी थीं कि कैबिनेट में उनके समाज को लोगों को जगह नहीं मिली है। उमा की नाराजगी को दूर करने के लिए कांग्रेस से बीजेपी में आए प्रद्युमन सिंह लोधी को छह घंटे के अंदर राज्य खाद्य आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बना दिया गया। साथ ही उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दे दिया गया।
    कैलाश जोशी की जमकर तारीफ
    उमा भारती से मिलने के बाद हाटपिपल्या पहुंचे थे। वहां उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी की प्रतिमा का अनावरण किया। साथ ही उन्होंने जोशी की जमकर तारीफ भी की। सिंधिया के इस दौरे के भी सियासी मायने हैं। दरअसल, हाटपिपल्या सीट से बीजेपी की तरफ से कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी चुनाव लड़ते थे। 2018 में वह कांग्रेस के मनोज चौधरी से चुनाव हार गए। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मनोज चौधरी भी बीजेपी में आ गए हैं। ऐसे में वह उपचुनाव होने वाले हैं। बीजेपी की तरफ से तय है कि मनोज चौधरी ही वहां से उम्मीदवार होंगे। ऐसे में दीपक जोशी ने पिछले दिनों नाराजगी व्यक्त की थी और कहा था कि उनके लिए विकल्प खुले हैं। बाद में वह भोपाल आकर पार्टी के नेताओं से मुलाकात की थी। उसके बाद वह पार्टी की बैठकों में शामिल होने लगे थे। अब यह कहा जा रहा है कि सिंधिया दीपक जोशी को ही साधने के लिए हाटपिपल्या गए थे। सिंधिया और शिवराज सोमवार को मनोज चौधरी और दीपक जोशी को एक मंच पर लाने में कामयाब हुए।
    केपी यादव से भी हो गया है मिलाप
    2019 के लोकसभा चुनाव में सिंधिया बीजेपी के केपी यादव से हार गए थे। सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद यादव से कभी बात नहीं हुई थी। पिछले दिनों एक वर्चुअल रैली के दौरान दोनों के बीच की दूरियां खत्म हो गईं। दोनों ने रैली के दौरान कहा कि हम एक हैं और एक-दूसरे की खुलकर तारीफ की। ऐसे में यह तो साफ है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया संगठन में अपनी एक अलग पहचान कायम करना चाहते हैं और विरोधियों को भी साथ लेकर चलने की कोशिश में लगे हैं।


    कल की सबसे ज्यादा पढ़ी गई खबर

    उमा भारती और ज्योतिरादित्य के रिश्तों की मजबूती सूबे की सियासत को दिखाएगी नई राह

  • Web Title jyotiraditya scindia came on a special mission in madhya pradesh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *