राजनीति

…. तो फिर क्या चार महीने के मेहमान होंगे “शिवराज“, कायम होगा नाथ “राज“?

कांग्रेस के विधायकों की बगाबत के चलते प्रदेश में कमलनाथ सरकार का पतन हो गया। पतन का कारण बने 22 विधायकों की विधानसभा की सदस्यता समाप्त हो चुकी है। शिवराज सिंह ने रिकॉर्ड चौथी बार प्रदेश की बागडोर संभाल ली है। आने वाले समय में विधानसभा के लिए 24 सीटों ( दो पहले से रिक्त) पर उपचुनाव होना है। चुनाव के लिए कांग्रेस नई रणनीति के तहत काम रही है और उसकी मंशा है कि 24 में 20 सीट जीतकर पुनः सत्ता में बापसी की जाए।

  •   विजय पाण्डेय 

ज्योतिरादित्य सिंधिया की अनदेखी और उपेक्षा कांग्रेस संगठन और सत्ता को भारी पड़ गई। कांग्रेस के हाथ से प्रदेश भी छिन गया और उसके 22 विधायक पार्टी भी छोड़ गए। इन सभी विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया। इसके चलते कांग्रेस का ग्वालियर-चंबल अंचल में ंसतही तौर पर संगठनात्मक ढांचे का ताना-बाना ही बिखर गया। घटनाक्रम से सबक लेते हुए पार्टी आलाकमान ने तत्काल प्रदेश कांग्रेस कमेटी को दिशा-निर्देश् देते हुए रिक्त हुए विधानसभा क्षेत्रों में नए सिरे से संगठन खड़ा करने के लिए कहा है।पार्टी का का मानना है कि 24 सीटों पर होने वाले चुनाव में कम से कम 20 सीटों पर जीत हासिल कर पुनः प्रदेश की सत्ता कांग्रेस के हाथ में लाई जा सकती है।
भाजपा में मचा हुआ है हड़कंप
प्रदेश की सियासत में अचानक और अप्रत्याशित रूप से घटित हुए घटनाक्रम से कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल के नेता हैरान हैं। कांग्रेस को किसी भी सूरत में इस बात का भान नहीं था कि ज्योतिरादित्य पार्टी को छोड देंगे। भाजपा के भी कई कद्दावरों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि सिंधिया उनकी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर लेंगे। सिंधिया के अलावा कांग्रेस के ही 22 पूर्व विधायकों के पार्टी में आ जाने से भाजपा में भी हड़कंप मचा हुआ है। कल तक जिनकी राजनीति महज सिंधिया का विरोध करने पर ही चमका करती थी वे सन्निपात में हैं। तो कुछ मौजूदा विधायकों सहित पूर्व विधायक, सांसद और मंत्रियों की भी नींद उड़ी हुई है। क्योंकि कुछ की सीटों से मंत्री-विधायक पद की कुर्बानी देकर भाजपा में पहुंचे नए-नवेले नेता जो चुनाव लड़ेंगे। तो कुछ विधायक-बागियों के चलते मंत्रीमंडल में शामिल नहीं हो सकेंगे।
पार्टी छोड़ सकते हैं कई बड़े नेता
कांग्रेस के मंत्री व विधायकों के पार्टी में आ जाने और उनके ही चुनाव लड़ने की स्थिति में भाजपा के अनेक नेता परेशान हैं। सूत्रों की माने तो भाजपा के कुछ जाने-माने नेता कांग्रेस में आने के लिए हर संभव प्रयास करने में लगे हुए हैं। वे किसी न किसी तरह कांग्रेस में आकर चुनाव लड़ना चाहते हैं। हालांकि अभी इस बारे में खुलकर बोलने को कोई भी तैयार नहीं है। यदि यही स्थ्ति रही तो भाजपा के संभावित प्रत्याशी (बागी कांग्रेसी) के लिए परेशनी का सबब बन सकती है।
कांग्रेस कर रही सतही तौर पर अध्ययन
कांग्रेस से जुड़े एक नेता के अनुसार इस बार पार्टी 24 सीटों पर सोची-समझी रणनीति के तहत चुनाव की तैयारी कर रही है। कांग्रेस उप चुनाव में पैराशूट प्रत्याशियों के बजाय स्थानीय स्तर के जमीन से जुड़े जनाधार वाले कार्यकर्ता पर दांव लगाने के मूड में है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर विधानसभा क्षे़त्र के नेताओं व कार्यकर्ताओं से फोन पर चर्चा कर उनकी मंशा जानी जा रही है।

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पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि कांग्रेस उपचुनाव प्रदेश में पुनः सत्ता में वापसी के लिहाज से लडे़गी। इसलिए पार्टी ने अभी सारे दरबाजे खुले रखे हैं और सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। यदि भाजपा का नामी चेहरा पार्टी में शामिल होता है तो अंतिम समय में उसके नाम पर भी सहमति देने से कोई परहेज नहीं होगा।
चुनाव आयोग करेगा तारीख का ऐलान
विधायकों के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई सीटों की जानकरी चुनाव आयोग को भेजी जा चुकी है। नियम के मुताबिक छह माह के भीतर चुनाव होना अनिवार्य है। संभावना जताई जा रही है कि कोराना के कहर का यदि असर खत्म हुआ तो फिर मई-जून में चुनाव हो सकते हैं, अन्यथा जुलाई-अगस्त में होंगे। हालांकि चुनाव की तारीख का ऐलान चुनाव आयोग को करना है।


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