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अंग्रेजों के काले कानून जैसा नागरिकता संशोधन कानून : उर्मिला मातोंडकर

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर देशभर में कई जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। बॉलीवुड इसको लेकर दो धड़ों में बांटा है एक इसके समर्थन में खड़ा है तो दूसरा धड़ा इस कानून का विरोध कर रहा है। सीएए को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री और पूर्व कांग्रेस नेता उर्मिला मातोंडकर ने इसके खिलाफ बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 1919 के रॉलेट एक्ट की तरह 2019 के नागरिकता संशोधन कानून को इतिहास के काले कानून के रूप में जाना जाएगा।
उर्मिला ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि 1919 में दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने बाद अंग्रेज यह समझ गए थे कि हिंदुस्तान में उनके खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में उन्होंने रॉलेट एक्ट जैसे कानून को भारत में लागू किया। वर्ष 1919 के इस रॉलेट एक्ट और 2019 के नागरिकता संशोधन कानून को अब इतिहास के काले कानून के रूप में जाना जाएगा।
वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर नागरिकता संशोधन अधिनियम को वापस लेने का अनुरोध किया है। बघेल ने पत्र में लिखा है कि जहां एक ओर इस अधिनियम का वर्तमान संशोधन धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों का विभेद करता प्रतीत होता है एवं भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 के विपरीत होने का संकेत दे रहा है।इसमें दूसरी ओर पड़ोसी देशों श्रीलंका, म्यांमार, नेपाल और भूटान इत्यादि देशों से आने वाले प्रवासियों के संबंध में इस अधिनियम में कोई भी प्रावधान नहीं है।
उन्होने पत्र में कहा हैं कि छत्तीसगढ़ में मूलत: अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के निवासी हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में गरीब, अशिक्षित एवं साधनविहीन हैं, जिसे इस अधिनियम की औपचारिकता को पूर्ण करने में कठिनाइयों का निश्चित रूप से सामना करना पड़ सकता है। संविधान के समक्ष सभी सम्प्रदाय समान होते हैं, संसद के द्वारा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सी.ए.ए.)धर्म निरपेक्षता के इस संवैधानिक आधारभूत भावना को खंडित करता दृष्टिगत हो रहा है।
बघेल ने पत्र में कहा कि जनमानस में विरोध प्रदर्शन को देखते हुए, गरीब तबके एवं असाक्षर लोगों को असुविधा न हो, देश में शांति बनी रहे, एवं संविधान की मूल अवधारणा सुरक्षित रहे, इन सबके दृष्टिगत, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (सी.ए.ए.) में लाये गये संशोधन को वापस लिया जाना चाहिए।

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